Spirituality

लोका जानि न भूलौ भाई।

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लोका जानि न भूलौ भाई।खालिक खलक, खलक मह खालिक, सब घटि रहा समाई।।अब्बलि अल्लह नूर उपाया, कुदरति के सभ बन्दे।एक नूर ते सब जग किया, कौन भले कौन मंदे।।ता अल्लाह की गति नहीं जानी, गुरु गुड़ दीन्हा मीठा।कहै कबीर मैं पूरा पाया, सब घटि साहिब दीठा।।– सन्त शिरोमणि, भगवान कबीर

Guided Meditation to destroy negative karma by Yogi Anand, Adwait Foundation

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Meditation can destroy the accumulation of negative karma, which creates blockages on the path to health, success, good relationships, harmony, abundance, peace, happiness, and other pursuing. The meditation gives so many physical, mental, emotional and behavioral benefits, in addition, this gives, if practiced properly, the solution of root cause of hindrances, obstacles, sufferings, and unhappiness.[…]

How to destroy the negative karma? by Yogi Anand

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10 minutes of profound meditation can destroy the negative Karma and impacts on your life. Meditation is enlightening the dark areas of your consciousness, and to dispel the accumulation of Karma. You, as a Soul, have immense light / luminosity, which can brighten / enlighten the darkness in your deepest layer of consciousness. The light[…]

पातंजल योग सूत्र, साधन पाद

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पातंजल योग सूत्र, साधन पाद अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ।।३ ।। अर्थ: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश – ये क्लेश हैं। व्याख्या: यहाँ पर पाँच प्रकार के क्लेश बताये गये हैं – (1) अविद्या से अर्थ अज्ञान से है। इसमें ज्ञान सही नहीं रहता। (2) अस्मिता से अर्थ अपनेआप से ज्यादा लगाव का होना है। यह[…]

योगी आनंद द्वारा भगवती दुर्गा की प्रार्थना

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हे माते! तू सर्वज्ञ है क्योंकि सबके भीतर स्थित आत्मा है तू। तेरी सत्ता चहुंओर और अनंत है। तू ब्रह्मा में रचनात्मक शक्ति, विष्णु में पालन-पोषण की शक्ति, एवं शिव में संहारक शक्ति के रूप में स्थित है। तेरे अनंत नाम व रूप हैं। शब्द, चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, शक्ति, तृष्णा, क्षान्ति (सहिष्णुता), जाति,[…]

पुण्य का संचय सुखदायक है

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भगवान बुद्ध ने देवकन्या के रोने के शब्द को सुनकर, उसके समक्ष प्रकाश फैला और सामने बैठे हुए उपदेश करने के सामान, कहा – “देवधीते, मेरे पुत्र कश्यप का रोकना कर्त्तव्य है, किन्तु पुण्य चाहने वालों का पुण्य कर्मो को करते ही रहना चाहिए. पुण्य करना इस लोक और परलोक, दोनों जगह सुखदायक है.” और निम्नलिखित गाथा को कहा –  “पुण्यन्चे पुरिसो कयिरा कयिराथेनं पुनप्पुनं, तम्ही छन्दं कयिराथ सुखो पुण्यस्स उच्ययो” अर्थात्, यदि मनुष्य पुण्य करे, तो उसे बार बार करे. उसमे रत होवे, क्योंकि पुण्य का संचय सुखदायक होता है.

वैदिक मन्त्रों द्वारा उद्देश्य प्राप्ति

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मन्त्रों में अनंत शक्ति होती है. हरेक मंत्र का कोई न कोई द्रष्टा होता है, जिन्होंने उस मंत्र को गहन ध्यान की अवस्था में साक्षात्कार किया, जिनके अक्षरों में अन्तर्निहित अपरिसीम शक्ति प्राप्त की जा सकती है .
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