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गोरखबोध वाणी

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श्री गोरखनाथ जी ने अपने गुरुदेव श्री मत्स्येन्द्र नाथ जी से पूछा: स्वामीजी! कोण देखना कोण विचारणा, कोण तत्त ले धरिवा सार। कोण देश मस्तक मुंडाईया, कोण ज्ञान ले उतरवा पार। भावार्थ: गुरुदेव! साधक को क्या देखना, क्या विचार करना, किस तत्त्व में वास करना, किसके लिए सिर मुड़ाना और किस ज्ञान को लेकर पर[…]
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