Posts Tagged: yogi anand

What is Power Yoga?

PIN power yoga in delhi
What is Power Yoga? – An Intense, Dynamic Version of Gym Yoga “POWER YOGA – for bodybuilders, fitness models, wrestlers and singers,” you might have heard. Or, you might have seen it described this way: “A powerful and flexible mid-section with explosive power moves.” Perhaps you’ve seen it described as “yoga with a twist.” Or,[…]

Guided Meditation to destroy negative karma by Yogi Anand, Adwait Foundation

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Meditation can destroy the accumulation of negative karma, which creates blockages on the path to health, success, good relationships, harmony, abundance, peace, happiness, and other pursuing. The meditation gives so many physical, mental, emotional and behavioral benefits, in addition, this gives, if practiced properly, the solution of root cause of hindrances, obstacles, sufferings, and unhappiness.[…]

पातंजल योग सूत्र, साधन पाद

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पातंजल योग सूत्र, साधन पाद अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ।।३ ।। अर्थ: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश – ये क्लेश हैं। व्याख्या: यहाँ पर पाँच प्रकार के क्लेश बताये गये हैं – (1) अविद्या से अर्थ अज्ञान से है। इसमें ज्ञान सही नहीं रहता। (2) अस्मिता से अर्थ अपनेआप से ज्यादा लगाव का होना है। यह[…]

पुण्य का संचय सुखदायक है

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भगवान बुद्ध ने देवकन्या के रोने के शब्द को सुनकर, उसके समक्ष प्रकाश फैला और सामने बैठे हुए उपदेश करने के सामान, कहा – “देवधीते, मेरे पुत्र कश्यप का रोकना कर्त्तव्य है, किन्तु पुण्य चाहने वालों का पुण्य कर्मो को करते ही रहना चाहिए. पुण्य करना इस लोक और परलोक, दोनों जगह सुखदायक है.” और निम्नलिखित गाथा को कहा –  “पुण्यन्चे पुरिसो कयिरा कयिराथेनं पुनप्पुनं, तम्ही छन्दं कयिराथ सुखो पुण्यस्स उच्ययो” अर्थात्, यदि मनुष्य पुण्य करे, तो उसे बार बार करे. उसमे रत होवे, क्योंकि पुण्य का संचय सुखदायक होता है.

Real Yoga

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Yoga is not confined to asana, pranayama, bandha, mudra, and kriyas only, but it pervades all activities of life. Some of the philosophers consider Yoga just as a method of exercises to make body and mind healthier. Lord Krishna defines Yoga as योग: कर्मसु कौशलम् ‘Yogah karmasu kaushalam’, which means”Perfection in Action is s Yoga”.[…]
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