Real Yoga

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Yoga is not confined to asana, pranayama, bandha, mudra, and kriyas only, but it pervades all activities of life. Some of the philosophers consider Yoga just as a method of exercises to make body and mind healthier. Lord Krishna defines Yoga as योग: कर्मसु कौशलम् ‘Yogah karmasu kaushalam’, which means”Perfection in Action is s Yoga”.[…]

सच्चा योग और सच्चा योगी

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बहुत ही थोडे लोग सत्य को प्रेम करते हैं, और उन थोडे लोगों मे कोइ विरला ही परम् सत्य तक पहुंच पाता है। परम सत्य की उपलब्धि ही जीवन् साधना का उद्देश्य है। अपनी दृष्टि को पवित्र किये विना सत्य को हम देख नहीं सकते। दृष्टि को धूमिल करते हैं – काम, क्रोध् और अहंकार[…]

आत्मनिष्ठा से अभय, और अभय से आत्मनिष्ठा

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आत्मनिष्ठा से अभय आता है और अभय से आत्मानिष्ठा आती है, इसीलिये उपनिषद् कहता है – “अभयम् ब्रह्म” अभय स्थिति ही आत्मा व ब्रह्म है | किसी भी प्रकार का भय तनाव उत्पन्न करता है, और तनाव आत्मा अर्थात शान्ति सुख आनन्द से दूर ले जाता है | भय तनाव पैदा करता है, तनाव मन[…]

A Truth of Death

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The life is followed by death, and death culminates in the birth in order to fulfill the remaining desires, till final salvation or Nirvana or Moksha, which in fact is the extinction of all cravings and desires. Death is sweet; it must be experienced while living in the body through practices of yoga and meditation.[…]

Self-improvement only way to Benedictions

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Namaste dear friends, Following is the third Mantra of Isha Upanishad, and same is mentioned in Shukla Yajurveda’s 40th chapter in third number, which is extremely enlightening. असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः। ताँस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः॥३॥ ईशोपनिषत् asurya naam te loka andhen tamasaavrtaah. taanste pretyaabhigachchhanti ye ke chaatmahano janaah. – 3, Isha[…]
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