पातंजल योग सूत्र, साधन पाद

पातंजल योग सूत्र, साधन पाद अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ।।३ ।। अर्थ: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश – ये क्लेश हैं। व्याख्या: यहाँ पर पाँच प्रकार

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योगी आनंद द्वारा भगवती दुर्गा की प्रार्थना

हे माते! तू सर्वज्ञ है क्योंकि सबके भीतर स्थित आत्मा है तू। तेरी सत्ता चहुंओर और अनंत है। तू ब्रह्मा में रचनात्मक शक्ति, विष्णु में

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पातंजल योग सूत्र, साधन पाद

पातंजल योग सूत्र, साधन पाद अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ।।३ ।। अर्थ: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश – ये क्लेश हैं।